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विवादों में एक स्कूल और दो अधिकारी, जांच की मांग

विवादों में एक स्कूल और दो अधिकारी, जांच की मांग

Published: 15 Sep, 2019

राजनांदगांव। शताब्दी शिक्षण व महिला कल्याण समिति, शंकरपुर द्वारा संचालित शताब्दी स्कूल को शंकरपुर सामुदायिक भवन में शाला संचालित करने की अनुमति आयुक्त नगर पालिक निगम राजनांदगांव के द्वारा दिनांक 08.08.2019 को दिया गया और जिला शिक्षा अधिकारी राजनांदगांव के द्वारा इस संस्था को स्कूल संचालित करने मान्यता नवनीकरण वर्ष 2021 कर दिया गया। जिले के दो उच्च अधिकारियों के द्वारा सभी नियम और कानून को ताक पर रखकर बच्चों के जीवन व भविष्य के साथ खिलवाड़ कर एक संस्था को सरकारी भवन में स्कूल संचालित करने की अनुमति और मान्यता दिया गया है, जो अब विवादों में घिरता नजर आ रहा है।

छत्तीसगढ़ पैरेंटस एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल के द्वारा अब इस मामले में शिकायत कर सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग किया गया है तो आयुक्त और जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा भी अब इस स्कूल के खिलाफ कार्यवाही की बात कह रहे है। निगम आयुक्त ने तो 28 अगस्त को शंकरपुर सामुदायिक भवन को तत्काल खाली करने के लिये अघ्यक्ष शताब्दी शिक्षण व महिला कल्याण समिति, शंकरपुर को पत्र जारी किया गया है, लेकिन स्कूल तो उसी भवन में संचालित हो रहा है। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी ने भी इस स्कूल को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है, लेकिन सवाल यह उठता है कि स्कूल संचालित करने के लिये आरटीई कानून में मान व मानक तय है और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने दिशा-निर्देश जारी किया है जिसमें स्कूल भवन, सुविधा, सुरक्षा के संबंध में स्पष्ट निर्देश दिये गये है। सुविधाविहिन प्रोईवेट स्कूलों को स्कूल संचालित करने अनुमति नहीं दिया जाना है जो मान व मानकों को पूर्ण नहीं करते है, इसके बावजूद जिले के जिम्मेदार अधिकारियों ने इसका कोई परवाह नहीं किया और सुविधाविहिन सरकारी भवन में स्कूल संचालित करने की अनुमति दे दिया।

क्या कहता का कानून-

1. प्रोईवेट स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति किया जाना अनिवार्य है।

2. प्राईवेट स्कूलों में 3 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जाना है।

3. प्राईवेट स्कूलों में सुरक्षा के पर्याप्त उपाय किया जाना है और अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र लेने अनिवार्य है।

4. प्राईवेट स्कूलों में कम से कम आधा एकड़ खेल का मैदान होना अनिवार्य है।

5. प्राईवेट स्कूलों में आवश्यक अधोसंरचना होना अनिवार्य है।

6. प्राईवेट स्कूलों में प्रयाप्त हवादार कमरे होना अनिवार्य है।

7. सुविधाविहिन प्राईवेट स्कूलों को स्कूल संचालित करने की अनुमति नही दिया जाना है।



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